पॉलिसी प्रपोज़ल्स फॉर इण्डिया डॉट कॉम

पॉलिसी प्रपोज़ल्स फॉर इण्डिया डॉट कॉम एक निरंतर विकासशील शोध-परक उद्यम है जो भारत के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और सरकार तथा उद्योग जगत मे हर स्तर पर कार्यरत नीति-निर्धारकों तक पहुँचने का उद्देश्य रखता है। ये वेबसाइट मुख्यतः देश के समक्ष उपस्थित कठिनतम चुनौतियों की तरफ ध्यान केंद्रित करती है और साथ-साथ ऐसे ठोस नीतिगत सुझाव प्रदान करने का प्रयास करती हैं जो इसके लक्षित पाठकों को उनके द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहायक सिद्ध हो। इस वेबसाइट पर लोक-प्रशासन, सामरिक-मामलों, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और विज्ञान ऐवं प्रौद्योगिकी जैसे विस्तृत विषयों पर लेख संकलित किये गये है।

गरीब ग्रामीण समुदाय की सेवा के लिए लाभदायक तरीके विकसित करके, आईसीआईसीआई बैंक अपनी बाज़ार क्षमता बढ़ा रहा है और उन स्व-सहायता समूहों को प्रेरित भी कर रहा है जो शक्तिशाली सामाजिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।
Posted On : 2010-02-19 more

हमें विकास के एक ऐसे प्रतिमान को विकसित करने पर जोर देना चाहिए जो अधिक व्यापक, सता और भारत की लम्बे समय से चली आ रही समस्याओं जैसे शिक्षा और जनसँख्या वृद्धि से निपट सके।
Posted On : 2010-02-19 more

भारत खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पूरे विश्वे में एक अग्रणी देश बन कर उभर सकता हैं अगर वह विनिर्माण और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों की ओर अपना ध्यान केन्द्रित करे और अपने उत्पादों का उसी तरह से विपणन करे जिस तरह से इस क्षेत्र में दूसरे विदेशी संगठन कर रहे हैं।
Posted On : 2010-02-19 more

भारत के ढहते हुए बुनियादी ढांचे के मद्देनज़र सरकार के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि बुनियादी ढांचे में निवेश को निजी उद्यमों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाया जाए.
Posted On : 2008-11-11 more

सरकार को कृषि और विनिर्माण क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि भारत में बढ़ती बेरोजगारी पर काबू पाया जा सके।
Posted On : 2008-11-11 more

भारत में गरीबी के कारणों की पड़ताल जिनकी वजह से समाप्त करने के लिए अरबों रुपए खर्च करने के बावजूद यह अस्तित्व में है।
Posted On : 2008-11-11 more

सरकार को विनियामक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ बैंको को और अधिक स्वतंत्रता देनी चाहिए ताकि वे अपने संसाधनों को और लाभदायक तरीके से इस्तेमाल कर सकें।
Posted On : 2010-02-19 more

ई-चौपाल प्रतिमान यह दर्शाता है कि एक बड़ा निगम बाजारों को पहचानने में और कृषि प्रणाली की दक्षता में वृद्धि करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है और इस तरीके से जिस से किसानो, ग्रामीण समुदाय और उसके अपने शेयरधारकों को भी लाभान्वित करे।
Posted On : 2010-02-18 more

शून्य आधारित बजट वर्तमान समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब भारत सरकार संसाधनों की कमी का बड़े पैमाने पर सामना करना पड़ रहा है।
Posted On : 2010-02-18 more

सरकार जल्दी से अचल संपत्ति क्षेत्र में आवश्यक सुधारों को लागू करना चाहिए ताकि इस वर्तमान अर्तिक मंदी के दौर से बाहर निकाला जा सके और और यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के इंजन के रूप में कार्य कर सके।
Posted On : 2010-02-18 more

यदि भारत को अपनी उर्जा की बढती हुई मांग को पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से पूरा करना है तो उसे अपनी पनबिजली उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करने की ओर ध्यान केन्द्रित करना होगा।
Posted On : 2010-02-18 more

'बॉटम ऑफ़ पिरामिड' समूह के ग्राहक मुख्यधारा के उत्पादों के सस्ते और कम गुणवत्ता वाले संस्करणों को नहीं अपनाएंगे। उनके लिए नए उत्पादों को तैयार करना होगा जिनमे लचीलापन, सरलता, गति और छोटे आकार जैसी विशेषताओं का ध्यान रखना होगा।
Posted On : 2010-02-18 more

भारत को इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करने होंगे क्योंकि इस क्षेत्र में विदेशी मुद्रा अर्जित करने की और रोज़गार सृजन की अपार संभावनाएं हैं और यह क्षेत्र देश में पोषण संकट से निपटने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
Posted On : 2010-02-18 more

2011 तक 10 फीसदी के आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करने और अमीर गरीब के बीच की खाई को पाटने के लिए भारत को उपयुक्त नीतिगत पहलों से छोटे और मझौले उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।
Posted On : 2010-02-18 more

भारतीय रिसर्व बैंक के प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराने के अधिदेश के बावजूद कार्यशील पूंजी की कमी भारत के छोटे और मझौले उद्योगों (एसएमई) के लिए एक बड़ी अड़चन बनी हुई है।
Posted On : 2010-02-18 more

भारत में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत मात्र 1.2-1.5 किलो के बीच जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा औसतन लगभग 7 किलो है। अतः सरकार कि ओर से इस दिशा में नीतिगत पहल की आवश्यक्ता है ताकि इस्पात की खपत को बढ़ावा और इस्पात उद्योग को प्रोत्साहन मिले।
Posted On : 2010-02-18 more

यह लेख उन कारकों को उजागर करता है जो 'बॉटम ऑफ़ पिरामिड' समूह की ओर लक्षित व्यापारिक उद्यमों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है. यह विश्व में सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे पिछड़े हुए ऐसे चार अरब लोगों का समूह है जिनकी आय दो अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन या उस से कम है.
Posted On : 2010-02-18 more