पॉलिसी प्रपोज़ल्स फॉर इण्डिया डॉट कॉम

पॉलिसी प्रपोज़ल्स फॉर इण्डिया डॉट कॉम एक निरंतर विकासशील शोध-परक उद्यम है जो भारत के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और सरकार तथा उद्योग जगत मे हर स्तर पर कार्यरत नीति-निर्धारकों तक पहुँचने का उद्देश्य रखता है। ये वेबसाइट मुख्यतः देश के समक्ष उपस्थित कठिनतम चुनौतियों की तरफ ध्यान केंद्रित करती है और साथ-साथ ऐसे ठोस नीतिगत सुझाव प्रदान करने का प्रयास करती हैं जो इसके लक्षित पाठकों को उनके द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहायक सिद्ध हो। इस वेबसाइट पर लोक-प्रशासन, सामरिक-मामलों, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और विज्ञान ऐवं प्रौद्योगिकी जैसे विस्तृत विषयों पर लेख संकलित किये गये है।

आज के समय में ग्रामीण भारत में पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए चिकित्सकों की कमी है और यह लेख वर्णन करता है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी की मदद से एक साथ प्रति दिन 500 मरीजों की देख-रेख कर सकता है।
Posted On : 2010-02-19 more

मानव तस्करी, जो दुनिया में मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आपराधिक गतिविधि है, भारत में पर्याप्त कानूनी प्रावधानों के बावजूद निरंतर चल रही है.
Posted On : 2010-02-19 more

भारत में ज़्यादातर मामलों में लोग अन्वेषण की भावना के बजाय अपने पैतृक स्थान में अवसरों की कमी के कारण ही दूसरे स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर हो जाते है, जिनसे उन क्षेत्रों में सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
Posted On : 2010-02-19 more

आरक्षण के मुद्दे का संबंध सामाजिक उत्थान से कहीं ज्यादा छात्रों के लिए अपने पसंद के पेशे को चुनने के दौरान सामने आने वाली अवसरों की कमी से है।
Posted On : 2008-11-11 more

यदि भारत सही अर्थों में शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में एक महाशक्ति बन कर उभारना चाहता है तो उसे अपने उच्च शिक्षा के ढांचे में बुनियादी परिवर्तन करने की आवश्यक्ता है।
Posted On : 2010-02-19 more

सरकार को वरिष्ठ स्तर पर खेलों का संचालन करने से हटकर उसे ज़मीनी स्तर पर बढ़ावा देने की ओर ध्यान देना चाहिए।
Posted On : 2010-02-19 more

जब तक सही भावना के साथ रैगिंग से जुड़े मौलिक मुद्दों , जिनकी एक लंबे समय से अनदेखी की जा रही है, को संबोधित नहीं किया जाता, तब तक इसे रोकने के सभी उपाय विफल हो जायेंगे. कुछ सुझावों की फेरहिस्त।
Posted On : 2010-02-19 more

भारत को स्पेनिश प्रणाली 'प्रीस्युम्ड कंसेंट' को अपनाना चाहिए जहाँ हर किसी को उसकी मृत्यु के पश्चात एक अंग-दाता माना जाता है जब तक कि उसने अपने जीवन काल में इर प्रक्रिया से बाहर रहने का विकल्प न चुना हो।
Posted On : 2010-02-19 more

यह लेख वर्णन करता है कि कैसे एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज़ और हिंदुस्तान यूनीलिवर लिमिटेड के बेच हुआ एक अनूठा गठबंधन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कम लागत में जल शोधक उपलब्ध करा रहा है.
Posted On : 2010-02-19 more

अगले कुछ वर्ष भारत जैसे विकासशील देशों के समक्ष 'बॉटम ऑफ़ पिरामिड' समूह को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु मोबाइल स्वास्थ्य प्रणाली का लाभ उठाने के संदर्भ में चुनौतिया और अवसर दोनों पेश करते हैं।
Posted On : 2010-02-19 more

"विश्व की जनसँख्या को बढ़ने से बहुत ही कम समय में रोका जा सकता है यदि गरीब युवा महिलाओं को गर्भधारण में देरी करने के लिए पुरस्कृत किया जाए. कोई भी अन्य मौजूदा योजना इस तरकीब से अधिक प्रभावशाली नहीं हो सकती।" - एच के गुप्ता
Posted On : 2010-02-19 more

मोबाइल फोन और उन पर वीडियो का प्रसारण किया जाना विज्ञापन और संचार जगत के लिए एक महान अवसर है. चैनल 19 'बॉटम ऑफ़ पिरामिड' समूह के व्यक्तियों को अपने साथ सूचीबद्ध करके उनसे वीडियो बनवाकर सही दिशा में बढ़ रहा है और निम्न स्तर पर रहने वाले लोगों के लिए एक नया सीएनएन तैयार कर रहा है।
Posted On : 2010-02-19 more

शिक्षा क्षेत्र जिसे किसी समय सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के अनन्य दायित्व के रूप में देखा जाता था, अब अनुसंधान और निजी निवेश के लिए अवसर प्रस्तुत करता है।
Posted On : 2010-02-19 more

भारत को विदेशी शिक्षा सेवा प्रदाताओं के लिए विशेष दिशा निर्देशों का खाका तैयार करना चाहिए ताकि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखा जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन संस्थानों द्वारा प्रदान किया जा रहे पाठ्यक्रम देश की समग्र प्राथमिकताओं के अनुसार प्रासंगिक हैं।
Posted On : 2010-02-19 more

श्रम और कार्यस्थल सुरक्षा कानूनों के बावजूद भारत में लाखों श्रमिक, भ्रष्टाचार और उचित प्रवर्तन तंत्र के अभाव के कारण, कारखानों में असुरक्षित परिस्थितियों में काम कर रहे हैं.
Posted On : 2010-02-19 more

रैगिंग करने की प्रवत्ति के पीछे छुपे हुए विनाशकारी मनोविज्ञान की समझ सरकारी एजेंसियों और शैक्षिक संस्थाओं द्वारा इस कुप्रथा को खत्म करने के प्रयासों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है
Posted On : 2010-02-19 more

उदारीकरण और भूमंडलीकरण के इस दौर में कुछ बड़े परिवर्तन करने की आवश्यक्ता है ताकि भारत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभरे।
Posted On : 2010-02-19 more

जब तक यह योजना भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादक संपत्ति नहीं उत्पन्न करेगी, तब तक यह अपने उद्देश्यों को हासिल करने में असफल रहेगी. इस योजना से सम्बंदित चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों का विश्लेषण
Posted On : 2010-02-19 more

गरीबों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में तीन चुनौतियां सामने आती हैं - खरीदने की क्षमता, उपलब्धता और गुणवत्ता. अभिनव विधियों को, जिनमे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी का समावेश हो, इन मुद्दों के प्रभावी और व्यवहारिक समाधानों के लिए अपनाने की आवश्यक्ता है.
Posted On : 2010-02-19 more

हमारे देश में चल रही पुरानी परीक्षा प्रणाली शिक्षण संस्थानों के परिसरों में शैक्षिक माहौल को बिगाड़ रही है. इस लेख में इस समस्या से निपटने के लिए कुछ ज़रूरी उपायों पर चर्चा की गई है।
Posted On : 2010-02-19 more

यह लेख वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में कुछ महत्वपूर्ण सुधारों पर प्रकाश डालता हैं जिनसे भारत में शिक्षा क्षेत्र में उत्थान लाया जा सके और उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
Posted On : 2010-02-19 more

उच्च शिक्षा संस्थान देश में जागरूकता पैदा करने के साथ ही मानवाधिकार आन्दोलन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Posted On : 2010-02-19 more